यह क्या 'मैं-मैं' लगा रखा है आपने सरकार? 'मैंने ये किया, मैंने वो किया, मैं ये नहीं करने दूंगा, मैं वो नहीं होने दूंगा'! कहीं आप भूल तो नहीं रहे कि आप एक गणतंत्र के चुने हुए सरकार के मंत्रिमंडल के प्रधान हैं, देश के प्रधानमंत्री हैं, कोई तानाशाह नहीं?
सनद रहे कि लोकतंत्र में सरकारी निर्णय मंत्रीमंडल की सामूहिक ज़िम्मेदारी (Collective Responsibility of the Cabinet) के तहत लिए जाते हैं। आपकी कोई सरकार है भी या नहीं? या आप खुद ही पूरे के पूरे सरकार हैं? आपके मंत्रीमंडल का कोई वजूद है भी, या कुछ पुतलों को बिठा कर खानापूर्ति की जा रही है? न, न! बुरा मत मानिए। आपके इस 'मैं-मैं' की वजह से इस प्रकार के प्रश्न तो उठेंगे ही माननीय प्रधानमंत्री महोदय!
साहब, जिन लोगों ने आपको प्रधानमंत्री चुना है, उनका कुछ सम्मान तो बनता है! लीजिये, आज फिर एक निःशुल्क सलाह देता हूँ (देश का नागरिक हूँ, इतना हक़ तो है ही)। 'मैं' के स्थान पर 'हम' और 'हमारी सरकार' जैसे शब्दों का प्रयोग करना शुरू कीजिए। जो अच्छा काम आपने किया है, उसका कुछ श्रेय अपने साथियों को भी दीजिये। विश्वास करें, अगर आप ऐसा करते हैं तो जनता की आँखों में आपका प्रभाव कम नहीं होगा, बल्कि सम्मान बढ़ेगा ही।
वैसे यह बीमारी आपके विरोधियों को भी है, पर आपको इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि एक तो प्रधानमंत्री होने के नाते आपका उत्तरदायित्व कुछ अधिक है, और दूसरा यह कि आपसे कुछ उम्मीदें हैं, उन से कुछ नहीं। उनको कह कर भी क्या होगा! आपको तो अपना समझ कर कुछ कह दिया, अब आशा करता हूँ आप भी अपना समझ कर मनन करेंगे..
सादर,
आपका अपना,
मैंगो मैन